पटना जिले में ही हो गया लाखों का खेल सामान की आपूर्ति हुई नहीं और पास हो गया बिल


रिपोर्ट - अनमोल कुमार/राजन मिश्रा 

पटना - बिहार के सरकारी विद्यालयों में राज्य मुख्यालय से यह निर्देश जारी किया गया था कि 31 मार्च के बाद किसी भी विद्यालय में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई नहीं करेंगे यानी उनके लिए डेस्क की व्यवस्था होगी और जिसके तहत तमाम जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश भी दिया गया था और काफी हद तक विद्यालयों में देश की आपूर्ति भी की गई पर पटना जिले में जो खेल हुआ है उसे पर कोई बोलने को तैयार नहीं है पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड के त्रिभुवन हाई स्कूल में एक ही बार में 300 बेंच की आपूर्ति का विपत्र 31 मार्च को जिला शिक्षा पदाधिकारी और आपूर्तिकर्ता महिला संवेदक के मिली भगत से भुगतान करवा लिया गया है जबकि विद्यालय में पहुंचने पर विद्यालय का कोई भी कर्मचारी इस विषय पर कुछ भी बोलने से इनकार करता रहा घंटों मशक्कत के बाद नाम नहीं छापने के शर्त पर कुछ शिक्षकों ने बताया कि पूरा सिस्टम जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय से संचालित हो रहा है एक विद्यालय में एक बार में 100 से ज्यादा देश की आपूर्ति नहीं की जा सकती फिर 300 देश की विपत्र की भुगतान कैसे हो गई है ऐसा ही मामला कन्या पार्वती स्कूल सिमरी बिहटा में भी देखने को मिला उच्च माध्यमिक विद्यालय जोधन विभाग कुरी में भी देश की आपूर्ति नहीं की गई है साथ ही साथ जगतरणी उच्च माध्यमिक विद्यालय रामपुर दियारा मनेर में भी इसी तरह की शिकायत है प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद सवाल का जवाब नहीं मिला कि जब सरकार ने नियम कानून सबके लिए सामान बनाए हैं तो फिर पटना जिले में बिना डेस्क की आपूर्ति के वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कैसे 31 मार्च को संवेदक को विपत्र का भुगतान कर दिया गया जो लगभग 75 लख रुपए का बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आपूर्तिकर्ता सामवेद को प्रति देश ₹5000 का भुगतान निर्धारित किया गया है एक संवेदक एक बार में एक विद्यालय में 100 से ज्यादा देश की आपूर्ति नहीं कर सकता।

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