रुद्रप्रयाग। अलकनंदा व मंदाकिनी के संगम स्थल पर स्थित मां चामुंडा मंदिर पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। आलम यह है कि मंदिर के पीछे खण्डहर पुजारी आवास कभी भी ढह सकता है, जबकि मंदिर से नदी तक पहुंच मार्ग पर रैलिंग न होने से श्रद्धालुओं को नदी में गिरने का भय बना रहता है। आपदा के बाद से लेकर आज तक सत्संग भवन भी जीर्ण-शीर्ण हालत में है, जिसके पुनर्निर्माण को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।


ब्रदी-केदार यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव और अलकनंदा व मंदाकिनी के संगम स्थल पर विराजमान मां चामुंडा मंदिर की ओर प्रशासन और नगर पालिका का कोई ध्यान नहीं है। हर वर्ष यात्राकाल के दौरान लाखों तीर्थ यात्री संगम स्थल पहुंचते हैं और नारदशिला के दर्शन करने के साथ ही मां चामंुडा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अपने अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान करते हैं। यहां से श्रद्धालु बद्री-केदार की यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह कि आपदा के चार साल बाद भी चामुंडा मंदिर से संगम स्थल तक सुरक्षा रैलिंग नहीं लगाई गई है, जबकि आपदा में तबाह हुए सत्संग भवन का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। दुख का विषय यह भी कि खण्डहर भवन की ओर भी प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। यह खण्डहर भवन कभी भी धराशायी होकर चामुंडा मंदिर को नुकसान पहुंचा सकता है। 

स्थानीय लोगों की ओर से कई बार प्रशासन और नगर पालिका को अवगत कराया जा चुका है, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आपदा के बाद से मंदिर के पास ऐसी कोई भी स्थान नहीं है, जहां पर यात्री कुछ देर विश्राम करें या फिर भजन-कीर्तन किये जांय। मंदिर की महंत सोमवार गिरी का कहना है कि आपदा में मंदिर का सत्संग भवन क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन और नगर पालिका संगम स्थल की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मंदिर के पीछे पुजारी भवन भी खण्डहर हालत में है, जो कभी भी ढह सकता है और इससे मंदिर को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से भी श्रद्धालुओं को खतरा बना हुआ है। हर शाम संगम में गंगा आरती की जाती है। इस दौरान श्रद्धालुओं के गिरने का भय बना हुआ रहता है। 

भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र रावत ने कहा कि ब्रदीनाथ और केदारनाथ यात्रा पड़ाव और अलकनंदा-मंदाकिनी के संगम स्थल की कोई सुधन नहीं ली जा रही है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम में पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर की स्थिति को देखकर श्रद्धालुओं को भी दुख होता है और वे यहां के पालिका और प्रशासन को कोसते हैं। उन्होंने कहा कि संगम स्थल पर सत्संग भवन और पुजारी भवन क्षतिग्रस्त होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे श्रद्धालुओं को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने पुजारी भवन के नवनिर्माण के साथ ही श्रद्धालुआंे की सुरक्षा के लिए रैलिंग लगाने की मांग की। वहीं इस संबंध में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि अलकनंदा व मंदाकिनी का संगम स्थल धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संगम के सौन्दर्यीकरण और सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान रखा जायेगा और जल्द ही निर्माण कार्य करवाया जायेगा। 
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